देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों को लेकर Supreme Court of India ने बड़ा और सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अस्पताल, स्कूल, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक जगहों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद उसी जगह वापस नहीं छोड़ा जाएगा।
कोर्ट द्वारा जारी किए गए नए निर्देश
Animal Welfare Board of India से जुड़े नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कई अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि लोगों की सुरक्षा और आवारा जानवरों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश:
- सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश Animal Welfare Board of India के नियमों को सख्ती से लागू करें।
- हर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश कम से कम एक जिले में Animal Birth Control (ABC) सेंटर शुरू करे, ताकि आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित किया जा सके।
- अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और जरूरी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
- स्थानीय निकायों और संस्थानों के अधिकारी जो आवारा कुत्तों से सार्वजनिक जगहों को सुरक्षित बनाने का काम कर रहे हैं, उन्हें कानूनी सुरक्षा दी जाएगी। ड्यूटी के दौरान किए गए काम के लिए सामान्य तौर पर उनके खिलाफ FIR या आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
- रेबीज से संक्रमित या बेहद खतरनाक कुत्तों के मामले में कानून के तहत जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं। इसमें जरूरत पड़ने पर euthanasia (दया मृत्यु) भी शामिल हो सकती है, ताकि मानव जीवन को खतरे से बचाया जा सके।
- सभी हाईकोर्ट्स को इन निर्देशों के पालन की निगरानी के लिए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामले दर्ज करने को कहा गया है।
- National Highways Authority of India यानी NHAI को भी हाईवे पर घूम रहे आवारा पशुओं की समस्या रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि Animal Birth Control (ABC) Rules का सही तरीके से पालन नहीं हुआ। कई जगहों पर काम अधूरा, कम बजट वाला और असमान तरीके से किया गया, जिसकी वजह से आवारा कुत्तों की समस्या लगातार बढ़ती गई।
कोर्ट ने आदेश बदलने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जिनमें पुराने आदेश में बदलाव की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि देश में डॉग बाइट की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और लोगों की सुरक्षा सबसे पहले है।
कोर्ट ने यह भी माना कि कई राज्यों में आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त काम नहीं हुआ है। इसी वजह से लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है और लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।
रेबीज और खतरनाक कुत्तों पर भी बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो कुत्ते रेबीज से संक्रमित हैं या बेहद आक्रामक हैं, उन्हें कानूनी प्रक्रिया और पशु चिकित्सकों की सलाह के बाद euthanasia यानी दया मृत्यु दी जा सकती है।
किन जगहों से हटाए जाएंगे आवारा कुत्ते?
कोर्ट के आदेश के बाद अस्पताल, स्कूल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, खेल मैदान और सरकारी दफ्तरों के आसपास विशेष कार्रवाई की जा सकती है।
नगर निगमों पर बढ़ेगा दबाव
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब नगर निगमों और स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ेगा कि वे आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर ठोस कदम उठाएं। कई शहरों में डॉग शेल्टर और नसबंदी केंद्र बनाने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है।
आम लोगों के लिए क्या मतलब?
अगर आपके इलाके में आवारा कुत्तों की समस्या है, तो आने वाले समय में प्रशासन की कार्रवाई तेज हो सकती है। कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि मानव जीवन और सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।







