बिना कोचिंग, बिना लैपटॉप बनीं IAS: गांव की बेटी IAS Divya Tanwar की कहानी बढ़ा देगी आपका हौसला कैसे घर से तैयारी कर पास किया UPSC एग्जाम

jagatexpress.com

IAS Divya Tanwar Success Story
WhatsApp Group Join Now

IAS Divya Tanwar Success Story : बिना कोचिंग, बिना लैपटॉप बनीं IAS गांव की बेटी दिव्या तंवर की कहानी बढ़ा देगी आपका हौसला कैसे घर से तैयारी कर पास किया UPSC एग्जाम, कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों तो गरीबी, मुश्किलें और हालात इंसान का रास्ता नहीं रोक सकते। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के छोटे से गांव की रहने वाली Divya Tanwar ने इस बात को सच साबित कर दिखाया।

न कोई बड़ी कोचिंग…
न महंगे नोट्स…
न लैपटॉप…
और न ही घर में पढ़ाई के लिए शानदार माहौल…

फिर भी दिव्या ने UPSC जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा पास करके IAS बनने का सपना पूरा कर लिया।

बचपन में पिता का साया उठ गया

दिव्या जब सिर्फ 8-9 साल की थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया। घर की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई। मां ने मेहनत करके तीनों बच्चों को पाला, लेकिन हालात आसान नहीं थे।

दिव्या अपनी मां की मेहनत को रोज करीब से देखती थीं। तभी उन्होंने मन में ठान लिया था कि एक दिन ऐसा काम करेंगी जिससे मां का सिर गर्व से ऊंचा हो जाए।

गांव के छोटे कमरे से शुरू हुआ IAS का सपना

दिव्या ने बताया कि उनके पास पढ़ाई के लिए न लैपटॉप था, न स्मार्टफोन और न ही इंटरनेट की सुविधा। गांव के एक छोटे से कमरे में बैठकर उन्होंने तैयारी शुरू की।

स्कूल में एक बार उन्होंने SDM अधिकारी को देखा था। उस दिन उनके मन में ख्याल आया कि एक दिन वह भी अफसर बनेंगी और अपनी मां को वही सम्मान दिलाएंगी।

खुद बनाई पढ़ाई की रणनीति

कॉलेज पहुंचने के बाद दिव्या को UPSC के बारे में पता चला। उन्होंने इंटरनेट और टॉपर्स के इंटरव्यू देखकर समझा कि तैयारी कैसे करनी है।

उन्होंने NCERT किताबों से शुरुआत की। जो किताबें जरूरी लगीं, वही खरीदीं। पैसे बचाने के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया और गांव के स्कूल में भी पढ़ाने लगीं।

सबसे बड़ी बात ये थी कि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि “मेरे पास संसाधन कम हैं इसलिए मैं नहीं कर पाऊंगी।”

पहले बनीं IPS, फिर भी नहीं रुकीं

दिव्या का पहला प्रयास 2021 में था। उस समय उन्होंने 438वीं रैंक हासिल की और IPS अधिकारी बनीं। बहुत लोग यहां रुक जाते, लेकिन दिव्या का सपना IAS बनना था।

उन्होंने हार नहीं मानी। फिर से मेहनत शुरू की और अगले ही प्रयास में कमाल कर दिया।

दूसरे प्रयास में बनीं IAS

UPSC 2022 के रिजल्ट में दिव्या तंवर ने 105वीं रैंक हासिल की और IAS अधिकारी बन गईं।

जिस बेटी ने गांव के छोटे कमरे में बैठकर सपने देखे थे, आज वही लाखों युवाओं की प्रेरणा बन चुकी है।

दिव्या की कहानी हमें क्या सिखाती है?

  • हालात कभी सपनों से बड़े नहीं होते
  • मेहनत का रिजल्ट देर से सही, मिलता जरूर है
  • सफलता पैसे से नहीं, मेहनत और धैर्य से मिलती है
  • अगर इरादा मजबूत हो तो छोटा गांव भी बड़े सपनों की शुरुआत बन सकता है

अगर आप भी जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो दिव्या तंवर की कहानी हमेशा याद रखिए…
“सपने वही पूरे करते हैं, जो मुश्किलों से डरते नहीं।”

Leave a Comment