मालविका नायर : “जब ज़िंदगी हमें कठिन फैसलों के दोराहे पर लाकर खड़ा करती है, तो कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने सपनों को भी पकड़ कर रखते हैं और जिम्मेदारियों को भी पूरी निष्ठा से निभाते हैं।”
ऐसी ही एक मिसाल बनकर सामने आई हैं IRS अधिकारी मालविका नायर, जिन्होंने UPSC 2024 में 45वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ एक अफसर बनने का सपना पूरा किया, बल्कि मातृत्व की जिम्मेदारी को भी बखूबी निभाया।
🏆 दो बड़े रोल—मां और अफसर—एक साथ निभाया
केरल की रहने वाली मालविका पहले से ही IRS सेवा में थीं, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य था IAS बनना। UPSC 2024 उनका छठा और अंतिम प्रयास था। इस बीच, 3 सितंबर 2023 को उन्होंने बेटे को जन्म दिया। ज्यादातर महिलाएं इस समय आराम और स्वास्थ्य पर ध्यान देती हैं, लेकिन मालविका ने सिर्फ 17 दिन बाद 20 सितंबर को मेन्स परीक्षा में भाग लिया।

👶 प्रेग्नेंसी में प्रीलिम्स, डिलीवरी के बाद मेन्स
मालविका नायर ने बताया कि उन्होंने गर्भावस्था के दौरान प्रीलिम्स की तैयारी की थी, और डिलीवरी के बाद की स्थिति में मेंस की परीक्षा देना किसी युद्ध से कम नहीं था। परीक्षा की तैयारी के दौरान वे मानसिक और शारीरिक रूप से थकी हुई थीं, लेकिन उनके हौसले बुलंद रहे।
उन्होंने ये भी साझा किया कि इंटरव्यू के समय उनका बेटा महज 4 महीने का था, और वह उसे दिल्ली लाईं ताकि वह उसे समय पर फीड करा सकें।
👨👩👦 परिवार बना सबसे मजबूत सहारा
इस कठिन सफर में मालविका नायर को सबसे बड़ा संबल मिला उनके पति नंदागोपन से, जो स्वयं एक IPS अधिकारी हैं। इसके अलावा उनके परिवार ने भी परीक्षा केंद्र पर बेटे को लाना, मानसिक समर्थन देना और हर छोटी-बड़ी जरूरत में साथ देना नहीं छोड़ा।
मालविका मानती हैं कि,
“अगर मेरा परिवार मेरे साथ ना होता, तो शायद मैं यह मुकाम हासिल नहीं कर पाती।”

💪 संघर्ष से सीखी जीत की परिभाषा
उनकी कहानी बताती है कि सपने और जिम्मेदारियां एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि जब दृढ़ निश्चय और समर्थन हो, तो दोनों साथ निभाए जा सकते हैं। मालविका का सफर हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो मां बनने के बाद अपने करियर या सपनों से समझौता कर लेती है।
✨ मालविका नायर की सफलता – हर महिला के लिए प्रेरणा
आज मालविका की कहानी UPSC की तैयारी कर रही महिलाओं और उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी है, जो जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जिंदा रखने का हौसला रखते हैं।
“सपने अगर सच्चे हों, तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं — और मालविका नायर इसका जीता-जागता उदाहरण हैं।”







